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अदृश्य शक्तियों से लड़ता “पैडमैन”

Posted On 30 Dec, 2017 में

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हमने बहुत से हीरो देखें हैं स्पाइडर मैन,आइरन मैन,शक्तिमान,कैप्टन अमेरिका और न जाने कितने ही है।इन सभी में ओैर पैडमैन में बस एक ही अन्तर है।ये सभी समाज के बाहरी शक्तियों से लड़ रहे हैं जो दिखती है जबकि पैडमैन समाज के मन में,मेरे -आपके ,हमारे सोच से जंग कर रहा है।

हम बात कर रहे हैं अक्षय कुमार की आने वाली फिल्म पैडमैन की जिसमें वह अरुणाचलम् मुरुगनाथम की भूमिका निभा रहे हैं।अरुणाचलम् मुरुगनाथम तमिलनाडु के छोटे गाँव से आते हैं।एक दिन उन्होंने देखा कि उनकी पत्नी उनसे छिपाकर एक कपड़ा ले जा रही है,वह कपड़ा वो अपने पीरियड्स में प्रयोग करती।अरुणाचलम् को यह देख बहुत दुख हुआ, वह कपड़ा इतना गंदा था कि शायद वो गाड़ी साफ़ करने में भी प्रयोग नहीं करते।अगले दिन अरुणाचलम अपनी पत्नी को खुश करने के लिए बाजार से सनैटरी पैड लाते हैं,पर उनकी पत्नी इससे खुश नहीं होती बल्कि वो कहती है कि हम इतना पैसा सनैटरी पैड पर नहीं खर्च कर सकते,हमें घर भी चलाना है।अरुणाचलम बहुत दुखी हुए,उन्होंने महिलाओं की समस्याओं को इतनी नजदीकी से नहीं देखा था।उन्होंने  इसे दूर करने की ठानी और आज वो नाममात्र के पैसो में पैड देश -विदेश में बेच रहे हैं।इस दौरान उनका सामाजिक बहिष्कार भी हुआ,पर वो सोच और समाज दोनों बदलने में सफल हुए।

आज से लगभग 130 साल पहले 1888 में सनैटरी पैड का आविष्कार हुआ था। 130 साल बाद भी आज हमारे देश की 88% महिलाएँ इसका प्रयोग नहीं करती है,जो दुखद है।अधिकतर महिलाएँ कपड़े का प्रयोग करती हैं।पिछड़े गाँवो में तो घास-फूस,पत्ते,यहाँ तक कि राख का भी प्रयोग किया जाता है।ये सब न केवल उनके सुविधानुसार नहीं है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी घातक है।माना कि लोगों के पास पहले पैसे नहीं थे पर अब जरूरत है इसका महत्व समझने की।सरकार को भी इसे टैक्स फ्री करना चाहिए बल्कि सबस्टिडी देना चाहिए।

पीरियड्स को लेकर समाज में अंधविश्वास भी बहुत है।पीरियड्स के दौरान महिलाएँ किचन में नहीं जा सकती,मंदिर नहीं जा सकती।सुना तो यहाँ तक गया है कि अचार छुने तक की भी मनाही है।ये रिवाज सालों से चला आ रहा है ।पहले के लोग महिलाओं को पीरियड्स में आराम देने के उद्देश्य से ये नियम बनाए होगें,पर हमारा समाज उसे गलत रूप से रख रहा है।मंदिर न जाने,छुत-अछुत की बात समझ से परे है।

पीरियड्स को लेकर हमारा समाज अभी खुला नहीं है।हम परिवार में खुलकर इसके बारे में बात नहीं कर सकते।माना कि यह विषय चर्चा करने वाला नहीं है,पर इतना गोपनीय भी नहीं है कि महिलाएं हमसे सनैटरी पैड मगाने में सोचें -झिझके।यह शौच जाने,खाना खाने जैसा सामान्य सी क्रिया है जो विश्व की लगभग आधी आबादी इससे हर माह गुजरती है।

घर में अगर बेटी है तो वो पीरियड्स के बारे मे केवल अपनी माँ से बताती है जबकी परिवार के अन्य सदस्यों से छिपाना पड़ता है।सनैटरी पैड माँ ही अपनी बेटी के लिए काले पन्नी या कागज में बाँध के लाती है। ये काम अगर घर के मर्द कर सके तो घर में सकारात्मक माहौल होगा,घर की महिलाएं सहज महसूस कर पाएगी और अपना हर सुख- दुख आपसे बाट पाएगी।ये झिझक टोड़ना है,तभी परिवारिक रिश्ता मजबूत होगा।सबसे बड़ी बात जब घर की महिलाएं सहज,स्वस्थ और मजबूत होंगी तो परिवार -देश स्वस्थ और मजबूत होगा।

पैडमैन के आने से न केवल हम अपने अंदर सोच बदल पायेगे बल्कि समाज भी सकारात्मक सोच की ओर अग्रसर होगा।

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